बजरंगबली क्यों हुए सिंदूरी

बजरंगबली क्यों हुए सिंदूरी


 




           शास्त्रों में इस विषय में जानकारी दी गई है कि जब रावण को मारकर राम जी सीता को लेकर अयोध्या आए थे, तब हनुमान जी ने भी भगवान राम और माता सीता के साथ आने की जिद की। राम ने उन्हें बहुत रोका। लेकिन हनुमान जी थे कि अपने जीवन को श्री राम की सेवा करके ही बिताना चाहते थे। श्री हनुमान दिन रात यही प्रयास करते थे कि कैसे श्री राम को खुश रखा जाए। एक बार उन्होंने माता सीता को मांग में सिंदूर भरते हुए देखा। तो माता सीता से इसका कारण पूछा लिया। माता सीता ने उनसे कहा कि वह प्रभु राम को प्रसन्न रखने के लिए सिंदूर लगाती है। हनुमान जी को श्री राम को प्रसन्न करने की ये युक्ति बहुत भा गई। उन्होंने सिंदूर का एक बड़ा बक्सा लिया और स्वयं के ऊपर उडे़ल लिया। और श्री राम के सामने पहुंच गए। तब श्री राम उनको इस तरह से देखकर आश्चर्य में पड़ गए। उन्होंने हनुमान से इसका कारण पूछा, हनुमान जी ने श्री राम से कहा कि प्रभु मैंने आपकी प्रसन्नता के लिए ये किया है। सिंदूर लगाने के कारण ही आप माता सीता से बहुत प्रसन्न रहते हो। अब आप मुझसे भी उतना ही प्रसन्न रहना। तब श्री राम को अपने भोले-भोले भक्त हनुमान की युक्ति पर बहुत हंसी आयी। और सचमुच हनुमान के लिए श्री राम के मन में जगह और गहरी हो गयी।
           हनुमान जी की आराधना से ग्रहों का दोष शांत हो जाता है। हनुमान जी और सूर्यदेव एक दूसरे का स्वरूप हैं, इनकी परस्पर मैत्री अति प्रबल मानी गयी है। इसलिए हनुमान साधना करने वाले साधकों में सूर्य तत्व अर्थात् आत्मविश्वास, ओज, तेजस्विता आदि स्वतः ही आ जाते हैं।